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Organic Farming
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एजोला (Azolla) एक तैरती हुई फर्न है जो शैवाल से मिलती-जुलती है। सामान्यत: एजोला धान के खेत या उथले पानी में उगाई जाती है। यह तेजी से बढ़ती है। अगर आप खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं तो अन्‍नदाता का यह एपिसोड आपके लिए काफी उपयोगी है. इस एपिसोड में हम पशुओं का अजोला उपजाने के तरीके सीखेंगे.

[1] यह जैव उर्वरक का स्त्रोत है

परिचय संपादित करें

एजोला पानी में पनपने वाला छोटे बारीक पौधो के जाति का होता है जिसे वैज्ञानिक भाषा मेंफर्न कहा जाता है। एजोला की पंखुड़ियो मे एनाबिना (Anabaena,) नामक नील हरित काई के जाति का एक सूक्ष्मजीव होता है जो सूर्य के प्रकाश में वायुमण्डलीय नत्रजन का यौगिकीकरण करता है और हरे खाद की तरह फसल को नत्रजन की पूर्ति करता है। एजोला की विशेषता यह है कि यह अनुकूल वातावरण में ५ दिनों में ही दो-गुना हो जाता है। यदि इसे पूरे वर्ष बढ़ने दिया जाये तो ३०० टन से भी अधिक सेन्द्रीय पदार्थ प्रति हेक्टेयर पैदा किया जा सकता है यानी ४० कि०ग्रा० नत्रजन प्रति हेक्टेयर प्राप्त। एजोला में ३.५ प्रतिशत नत्रजन तथा कई तरह के कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो भूमि की ऊर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।

धान के खेतों में इसका उपयोग सुगमता से किया जा सकता है। २ से ४ इंच पानी से भरे खेत में १० टन ताजा एजोला को रोपाई के पूर्व डाल दिया जाता है। इसके साथ ही इसके ऊपर ३० से ४० कि०ग्रा० सुपर फास्फेट का छिड़काव भी कर दिया जाता है। इसकी वृद्ध के लिये ३० से ३५ डिग्री सेल्सियस का तापक्रम अत्यंत अनुकूल होता है।

एजोला के उपयोग से धान की फसल में ५ से १५ प्रतिशत उत्पादन वृद्ध संभावित रहती है।

इस फर्न का रंग गहरा लाल या कत्थाई होता है। धान के खेतों में यह अक्सर दिखाई देती है। छोटे-छोटे पोखर या तालाबों में जहां पानी एकत्रित होता है वहां पानी की सतह पर यह दिखाई देती है।

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